नजूल एनओसी 10 हजार में, वरना परेशानी फिजूल

– बड़े अफसरों के आदेश पर भी नहीं हो रहे जारी
ब्रह्मास्त्र उज्जैन। आप माने या न मानें पर ये अंदर की बात है। नजूल एनओसी का एक पत्र लेने के लिए आम लोगों को 10 हजार रुपये देना पड़ते हैं। नजूल तहसील में ये खेल बड़ी चालाकी से हो रहा। एक मामला ऐसा भी सामने आया है, जिसमें बड़े अफसर के आदेश के बाद भी तहसीलदार नजूल ने जारी नहीं किया।
दरअसल, नजूल की एनओसी यानी अनापत्ति प्रमाणपत्र की अनिवार्यता नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में लगती है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि जमीन सरकारी तो नहीं। लेकिन इस सामान्य कागज के लिए नजूल तहसील में लोगों को 10-10 हजार रुपये देना पड़ते हैं। जो लोग पैसा दे देते हैं, उनके काम आसानी से कर दिए जाते हैं और जो नहीं देता उनके काम छोटी त्रुटियों की आड़ लेकर अटका दिए जाते हैं। ऐसे में लोग परेशानी से बचने के लिए पैसा देकर काम कराना ज्यादा पसंद करते हैं। पैसा न देने वालों के एनओसी त्रुटियों की आड़ लेकर अटका दिए जाते हैं। इनको सुधरवाने में समय खप जाता है। इस तरह के मामले कलेक्टर आशीषसिंह तक पहुंच नहीं पाते इस कारण तहसील के अफसर मलाई खाते रहते हैं।
ओआईसी के आदेश पर भी जारी नहीं पत्र
बुधवारिया निवासी सूचित गोयल पिता सत्यनारायण की कस्बा उज्जैन के अंतर्गत सर्वे नंबर 1692/2/1/2 की 0.095 हेक्टेयर जमीन के मामले में औद्योगिक उपयोग के लिए टीएंडसीपी ने नजूल तहसील में पत्र भेजा था। मामले में कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ प्रभारी अधिकारी (ओआईसी) गरिमा रावत ने भी निर्देश जारी कर दिया लेकिन नजूल तहसील ने तकनीकी आड़ लेकर मामला उलझा दिया और अब तक एनओसी ही जारी नहीं की। ऐसे मामलों से नजूल तहसील वाले लोगों को ये संदेश देते हैं कि रिश्वत के रूप में पैसा न देने वालों को इस तरह परेशान होना पड़ता है।
लूपलाइन की पीड़ा
नजूल तहसील को लूपलाइन माना जाता है। इस कारण कोई तहसीलदार यहां काम नहीं करना चाहता। केवल एनओसी ही ऊपरी कमाई का जरिया है। इस कारण भी आम लोगों को शिवराज सरकार में भी परेशान होना पड़ रहा। ऐसे मामलों से सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही।

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