अगले सिंहस्थ में 42 फीसदी क्षेत्र बढ़ने का है शासकीय अनुमान

शिप्रा नदी के पास का क्षेत्र आवासीय हो गया तो फिर कहां से आएगी सिंहस्थ के लिए खुली जमीन..?
  सिंहस्थ 2028 में 4348 हेक्टेयर जमीन लगेगी , अभी सिर्फ 3060 हेक्टेयर है सिंहस्थ के लिए सुरक्षित जमीन
उज्जैन। शहर के लिए इस वक्त सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पुण्य सलिला शिप्रा के पास का क्षेत्र यानी नदी तट आवासीय घोषित कर दिया गया तो  सिंहस्थ का क्या होगा? ऐसा इसलिए क्योंकि आने वाले सिंहस्थ में पिछले सिंहस्थ की तुलना से 42 फ़ीसदी क्षेत्र बढ़ने का शासकीय अनुमान है। इस हिसाब से पूरा गणित लगाया जाए तो वर्ष 2028 में 4348 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी। अभी 30 60 हेक्टेयर जमीन सिंहस्थ के लिए अधिसूचित है। इसका अर्थ यह हुआ कि 1288 हेक्टेयर जमीन की और जरूरत होगी। आखिर यह कहां से आएगी। नदी के पास का क्षेत्र अगर आवासीय घोषित कर दिया तो और मुश्किल खड़ी हो जाएगी। मास्टर प्लान की मीटिंग में जो लोग नदी के आसपास की खुली जमीन अर्थात सांवराखेड़ी, जीवनखेड़ी और दाऊद खेड़ी की जमीन को आवासीय करवाने पर तुले हुए हैं, उन्हें सिंहस्थ से कोई लेना – देना नहीं है। उन्हें तो बस वहां पर कॉलोनी काटना है, मकान बनाने हैं, आलीशान बिल्डिंग ताननी है। रिसोर्ट बनाने हैं। मास्टर प्लान जिस तरह विवादों में घिर गया है, उसे देखते हुए अब निर्णय भोपाल को ही करना होगा। गेंद अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पाले में है। मुख्यमंत्री को इस पर विशेष तौर पर ध्यान इसलिए भी देना होगा क्योंकि जो प्रस्तावित मास्टर प्लान दिया गया है उसमें सिंहस्थ बाईपास के आसपास की जमीन को आवासीय घोषित करने का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव सुनकर ही पूरा उज्जैन तमतमा उठा है। साधु – संत, समाजसेवी और विपक्षी पार्टियां ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह   चौहान की पार्टी भाजपा के वरिष्ठ नेता और बुजुर्गबार भी आवासीय करने के खिलाफ हैं। खुले तौर पर उन्होंने मांग भी की है कि सांवराखेड़ी, जीवनखेड़ी तथा दाऊदखेड़ी की खुली जमीनों को सिंहस्थ क्षेत्र घोषित किया जाए। वास्तव में यह मुद्दा राजनीतिक नहीं है, बल्कि सिंहस्थ की आवश्यकता है। सिंहस्थ को और भूमि चाहिए और वह बाईपास के आस-पास ही सुगमता से उपलब्ध है।

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