महाकाल क्षेत्र में सजेगी शिव बारात की झांकी

उज्जैन । महाकाल मंदिर क्षेत्र में अब शिव बारात की झांकी भी सजेगी। नंदी पर सवार भगवान शिव, उनके आगे मंगल वाद्य यंत्र बजाते ऋषिमुनि, देवता और झूमते-नाचते चलते असुरगणों की प्रतिमाएं आकार लेने लगी हैं। सभी फाइबर से बनी हैं, जिन पर तेज धूप, सर्दी, बारिश का कोई असर नहीं पड़ेगा। कैलाश पर्वत पर विराजित भगवान शिव के पूरे परिवार की झांकी, 18 फीट ऊंची खड़े गणेश, पंचमुखी हनुमान सहित 125 विशाल देवताओं और ऋषियों की प्रतिमाएं भी स्थापना के लिए तैयार हो गई है। इन सभी की स्थापना चि-ति स्थानों पर मई-जून में हो जाएगी। सितंबर के बाद महाकाल क्षेत्र पूरी तरह निखरा हुआ नजर आएगा।

मालूम हो कि दो साल पहले उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी ने शहर के एतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रख महाकाल मंदिर क्षेत्र विकास एवं सुंदरीकरण की योजना बनाई थी। पहले चरण में 97 करोड़ र्स्पये से महाकाल-रूद्रसागर क्षेत्र विकास एवं सुंदरीकरण करने का जिम्मा गुजराती की एमपी बाबरिया कंस्ट्रक्शन कंपनी ने हाथ में लिया था। प्रोजेक्ट का नाम रखा महाकाल-र्स्द्रसागर एकीकृत विकास परियोजना यानी मृदा। कंपनी को त्रिवेणी संग्रहालय के पीछे बड़ा रूद्रसागर तरफ महाकाल प्लाजा, 920 मीटर लंबा कोरिडोर, शिव अवतार वाटिका, घाट, शिव स्तंभ, कमल तालाब, सप्त ऋषि वन, व्यावसायिक दुकानों का निर्माण 18 महीने में करके देना था, पर लाकडाउन और फिर श्रमिक की समस्या की वजह से प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं हो सका। अब ये प्रोजेक्ट सितंबर-2021 तक पूरा करने का दावा कंस्ट्रक्शन कंपनी और उज्जैन स्मार्ट सिटी कंपनी ने किया गया है। कहा गया है कि प्रोजेक्ट पूरा होने पर यहां आए श्रद्धालु अच्छा महसूस करेंगे। वे अधिक दिन रूकेेगे तो शहर की अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा।

9 से 25 फीट तक की 125 प्रतिमाएं, रंग कौनसा चढेगा तय नहीं

मृदा प्रोजेक्ट अंतर्गत 9 से 25 फीट ऊंची 125 प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। इनमें 40 प्रतिमाएं लाल पत्थर की हैं, जबकि शेष फाइबर की। सभी की स्थापना मई-जून में करने का दावा कंपनी ने किया है। इन पर रंग कौनसा चढेगा यह अभी तय नहीं हुआ है। अभी रथ पर सवार भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर का वध किए जाने और सप्तऋषियों की प्रतिमाएं स्थापित कर दी गई हैं। कहा गया है कि शिव अवतार वाटिका में भगवान शिव की विभिन्ना्‌ मुद्राओं वाली प्रतिमाएं स्थापित होंगीं। यहां 2 हजार श्रद्धालुओं के बैठने के लिए कुर्सियां लगाई जाएंगी। यहीं फूल-प्रसादी और पूजन सामग्री की 54 दुकानें बनाई जाएंगीं। यहीं फैसिलिटी सेंटर भी बनाया जाएगा।

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